कांग्रेस का स्पीकर से सवाल, अब क्यों सीएम पुष्कर धामी के कंधे का सहारा ढूंढ रही हैं ऋतु खंडूड़ी, बार बार विधिक राय के नाम पर कोर्ट, सरकार, आम जनता को गुमराह करने का आरोप, महाधिवक्ता के पत्र को 15 दिन से दबाकर अपने रिश्तेदारों को बचा रही हैं ऋतु खंडूड़ी
देहरादून। राज्य की विधानसभा नियुक्तियों में बड़ा विवाद उत्पन्न करने को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने विधानसभा स्पीकर पर आरोप लगाया है।
दसौनी ने कहा की विधानसभा अध्यक्ष ने व्यर्थ ही विधानसभा नियुक्ति मामले में लगातार झूठी बयानबाजी कर प्रदेश की जनता को गुमराह करने का काम किया है। दसौनी ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब विधिक राय को लेकर विधानसभा स्पीकर ने भ्रमित करने वाला बयान दिया हो और सभी से सच्चाई छुपाई हो। दसौनी ने कहा की विधानसभा अध्यक्ष ने हाल ही में बयान दिया कि उन्होंने सरकार को पत्र लिखकर विधिक राय मांगी है जबकि महाधिवक्ता बाबुलकर उन्हें 9 जनवरी 2023 को ही अपनी राय दे चुके थे ।
दसोनी ने बताया कि इससे पहले भी जब विधानसभा नियुक्ति मामले में उच्च न्यायालय की सिंगल बेंच से विधानसभा कर्मियों को स्टे मिल गया था तो डबल बेंच में मामला ले जाने बाबत प्रश्न पूछे जाने पर स्पीकर लगातार उसे नकारती रही और दूसरी तरफ बिना किसी को हवा लगे उच्च न्यायालय के डबल बेंच में अपील कर दी ।
दसौनी ने कहा कि कांग्रेस भी पहले दिन से इसी बात को कहती आई है जिस बात का उल्लेख महाधिवक्ता बाबुलकर ने रिपोर्ट में की है।
बाबूलकर ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा है की 2016 से पहले की विधानसभा नियुक्तियों के नियमतीकरण को वैध ठहराया जाए ऐसा कोई भी डॉक्यूमेंट उन्हें नहीं दिया गया है।
वही बाबुलकर ने कोटिया कमेटी की रिपोर्ट को कोट करते हुए कहा की कोटिया कमेटी ने भी राज्य गठन से लेकर अब तक की सभी नियुक्तियों को अवैध ठहराया था ऐसे में उनके पास कोई कारण नहीं कि वह 2016 से पहले हुई नियमितीकरण को वैध ठहरा सकें। यही तर्क देते हुए बाबुलकर ने कोई भी विधिक राय देने में असमर्थता जाहिर की है।
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वही बाबुलकर ने कोटिया कमेटी की रिपोर्ट को कोट करते हुए कहा की कोटिया कमेटी ने भी राज्य गठन से लेकर अब तक की सभी नियुक्तियों को अवैध ठहराया था ऐसे में उनके पास कोई कारण नहीं कि वह 2016 से पहले हुई नियमितीकरण को वैध ठहरा सकें। यही तर्क देते हुए बाबुलकर ने कोई भी विधिक राय देने में असमर्थता जाहिर की है।
दसौनी ने कहा कि कांग्रेस पहले दिन से कह रही है की विधानसभा अध्यक्ष के द्वारा की जा रही कार्यवाही एक तरफा और पक्षपात पूर्ण रवैया अपनाए हुए हैं।
गरिमा ने स्पीकर की मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिए और कहा कि भ्रष्टाचार मुक्त शासन की बात करते-करते स्पीकर खुद ही भाई भतीजावाद का शिकार हो गई है और अब जब कोई रास्ता नहीं सूझ रहा तो सरकार और महाधिवक्ता को बैशाखी बनाने का प्रयास कर रही हैं ।
दसौनी ने कहा कि नैतिकता के आधार पर जरूर इन नियुक्तियों को गलत ठहराया जा सकता है परंतु यदि न्याय की दृष्टि से देखा जाए तो सिर्फ आधे लोगों के ऊपर कार्यवाही करना न्याय संगत नहीं जान पड़ता ।
दसौनी के अनुसार आज विधानसभा अध्यक्ष के कच्चे होमवर्क और अति उत्साही बिना सोचे समझे फैसलों की वजह से समूची विधानसभा पर बड़ा संकट आन पड़ा है।
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