देहरादून। उत्तराखंड का ड्रग डिपार्टमेंट इन दिनों फिर चर्चाओं में है। बीते दिनों विभागीय मंत्री की नाराजगी के बाद सालों से अवैध तरीके से इस पद पर डटे साहब को इस पद से अपनी विदाई रास नहीं आ रही। यही वजह है कि बीते कुछ दिनों से खतकर्म करने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे।
जो नए अफसर इस कुर्सी पर विराजे हैं उन्हें धकेलने के लिए अब जमकर जोर लगाया जा रहा रहा है। फर्जी शिकायतों से लेकर छुटभैयों को आगे कर खेल करने की कोशिश की जा रही है ताकि किसी भी तरह फिर से कुर्सी मिल जाये।
वहीं, पद से अपदस्थ होने के बाद से जो जिम्मा इन साहेब को मिला है उसे लेकर कतई गंभीरता नही है। स्थिति ये है कि बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से निकले वाली कहावत इनसे बर्दाश्त नहीं हो रही। इसी लिए दून का मोह है कि छूटता ही नहीं। बहाना बनाया हुआ है एक कामचलाऊ पद का। दरअसल इनके पास दून में कामचलाऊ पद भी है। इसी की आड़ में तीन तिकड़म किये जा रहे हैं।
वहीं, इस पूरे खेल को बाहर से देख रहे एक डेढ़ श्याने ने इन साब हो ही कांटे में फंसाने के लिए कांटा डाल दिया। साहब फंस भी गए और ब्लैक मेलिंग के खेल में उत्त्तराखण्ड में क्या होता है बताने की जरूरत नहीं। 24 घंटे पहले ही अपने इस मामले को सुलटाने के लिए अछी खासी रकम खर्ची गयी। पर सवाल ये की इतने सालों तक इस विभाग के आका रहने के बावजूद इतनी गिरी हरकतें क्यों कि जा रही है।
कहा तो यहां तक जाता है कि इन्होंने अकूत मतलब अकूत दौलत अपने राज में कमाई। अब यह जा रही है तो ये रास नहीं आ रहा। इनका साथ कुछ फूंके हुए कारतूस दे रहे हैं ।
आपको ये भी बता दें कि इस विभाग में उछलने वालों का सफर हमेशा से विजिलेंस के जरिये जेल में ही समाप्त हुआ। इस बार तो ed से लेकर सबकी निगाह इन पर है।
